अब दाखिला रद्द करने पर कॉलेज लौटाएंगे फीस, नियम तोड़ने वाले कॉलेजों की मान्यता होगी रद्द
देशभर के छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने साफ कहा है कि जो छात्र कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद किसी कारणवश प्रवेश रद्द कराते हैं, उन्हें पूरी फीस वापस करनी होगी। अगर कोई कॉलेज या संस्थान ऐसा नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी और सरकारी अनुदान भी बंद किया जा सकता है।
💡 क्या है नया नियम?
दाखिला रद्द फीस वापसी UGC के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक —

अगर कोई छात्र दाखिला लेकर बाद में प्रवेश रद्द करता है, तो कॉलेज को फीस वापस करनी होगी।
किसी भी कॉलेज को बिना अनुमति फीस बढ़ाने या अतिरिक्त शुल्क लेने की अनुमति नहीं होगी।
जो संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी — उनकी मान्यता रद्द हो सकती है और उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
🎓 क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ समय से कई छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सामने आ रही थीं कि कॉलेज दाखिला रद्द करने पर फीस वापस नहीं करते। कुछ जगहों पर तो कॉलेज प्रशासन ने मनमानी करके ज्यादा फीस भी वसूल की थी। इन मामलों को देखते हुए UGC ने अब नियम सख्त कर दिए हैं ताकि छात्रों का शोषण न हो।
🧾 छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?
इस नियम से छात्रों और अभिभावकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। अब अगर कोई छात्र किसी कारण से दाखिला छोड़ना चाहता है, तो उसकी मेहनत की कमाई व्यर्थ नहीं जाएगी। कॉलेज को तय समय में फीस वापस करनी होगी। साथ ही, मनमानी करने वाले कॉलेजों को अब डर रहेगा कि अगर वे नियम तोड़ते हैं, तो उनका कॉलेज बंद भी हो सकता है।
⚠️ कॉलेजों को दी गई चेतावनी
UGC ने सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी है कि वे फीस वापसी की प्रक्रिया पारदर्शी रखें। छात्रों से ज्यादा फीस वसूली या प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर कॉलेज की मान्यता रद्द करने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कई राज्यों में शिक्षा विभागों ने भी आदेश जारी किए हैं कि कॉलेज फीस वापसी के मामलों में तुरंत कार्रवाई करें।
👩🎓 छात्रों के लिए जरूरी बातें
दाखिला लेते समय कॉलेज से फीस वापसी की शर्तें लिखित में जरूर लें।
अगर कॉलेज फीस वापस नहीं करता, तो उसकी शिकायत UGC पोर्टल या शिक्षा विभाग में करें।
किसी भी स्थिति में कॉलेज या विश्वविद्यालय आपको फीस वापसी से मना नहीं कर सकता।
सरकार और UGC का यह कदम छात्रों के हित में बड़ा फैसला माना जा रहा है। इससे शिक्षा संस्थानों की मनमानी पर रोक लगेगी और छात्रों को न्याय मिलेगा।
अब कॉलेजों को नियमों के तहत ही काम करना होगा, वरना उनकी मान्यता और अनुदान दोनों पर संकट आ सकता है।









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